Class 12 Hindi – लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Notes)
महत्वपूर्ण कहानी आधारित प्रश्न
Q41. मितकथन में अतिकथन से अधिक शक्ति होती है?
उत्तर: मितकथन का अर्थ है-संक्षिप्त कथन और अतिकथन का अर्थ है-सविस्तार कथन। इधर की कविताएँ मितकथन का ही सहारा ले रही है। मितकथन वाली कविताएँ हाथ की तरह गर्म और सुन्दर होती है। अतिकथन के पाठक कम मिलते हैं। लोगों के पास समय का अभाव हो गया है।
Q42. प्रगीत को आप किस रूप में परिभाषित करेंगे? इसके बारे में क्या धारणा प्रचलित रही हैं?
उत्तर: सुख-दुःख की आवेशमयी अवस्था विशेष को गिने-चुने शब्दों में स्वर-साधना के उपयुक्त अभिव्यक्ति देना ही गीत है, प्रगीत है। ये आत्मपरक प्रगीत यथार्थ को प्रतिध्वनित करते हैं।
आज भी प्रगीत के रूप में प्रायः उसकी कविता को स्वीकार किया जाता है जो नितांत वैयक्तिक और आत्मपरक हो।
कविता में जब प्रगीतात्मकता सीमित हुई तो दूसरे में प्रगीतात्मकता के कुछ नए आयाम विकसित हुए।
प्रगीतात्मकता का आरंभ वहीं है जहाँ कवि समाज के विरुद्ध खड़ा होता है।
Q43. हिंदी की आधुनिक कविता की क्या विशेषताएँ आलोचक ने बताई हैं?
उत्तर: आधुनिक हिंदी कविता पर समाज का दबाव है। वह अन्तर्विरोधों और विडम्बनाओं से दूर हटकर प्रगतिशील और सामाजिक हो गयी है।
मुक्तिबोध, नागार्जुन, त्रिलोचन, अरुणकमल आधुनिक हिंदी कविता के श्रेष्ठ कवि है।
Q44. हिंदी कविता के इतिहास में प्रगीतों का क्या स्थान है, सोदाहरण स्पष्ट करें?
उत्तर: हिंदी में प्रबंध काव्य को श्रेष्ठ और गीतिकाव्य को द्वितीय स्थान दिया गया। कितनी बड़ी विडम्बना है कि जिस साहित्य में काव्योत्कर्ष के मानदंड प्रबंधकाव्यों के आधार पर बने हों और जहाँ प्रबंधकाव्य को ही व्यापक जीवन के प्रतिबंध के रूप में स्वीकार किया गया हो, उसकी कविता का इतिहास मुख्यतः प्रगीत मुक्तकों का है, यही नहीं बल्कि गीतों ने ही जनमानस को बदलने में क्रांतिकारी भूमिका अदा की है।
विद्यापति, तुलसी, सूर, मीरा, नानक, रैदास की भक्तिकालीन
कविता हिंदी का स्वर्णकाव्य है।
स्वतंत्रता संग्राम के समय की कविता में मैथिलीशरण गुप्त का सम्माननीय स्थान रहा है। आधुनिक काल में मुक्तिबोध, त्रिलोचन और नागार्जुन की कविता का स्वाद समाजवादी हो चला है। हिंदी कविता के इतिहास में प्रगीतों का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा है। इन्हीं प्रगीतों में भारतीय जनमानस को जीवंत बनाए रखा है।
Q45. लेखक की भाभी क्या कहती हैं? उनके कथन का महत्त्व बताइए ।
उत्तर: जब लेखक पैसों के लिए बैल की खाल उधेड़कर लौटा तो उसके पैर जवाब दे रहे थे। कपड़े गंदे हो गए थे। खून के धब्बे दिखाई दे रहे थे।
इस हालत में देखकर माँ रोने लगी। बड़ी भाभी ने उस रोज माँ से कहा था-"इनसे ये न कराओ, भूखे रह लेंगे इन्हें इस गंदगी में ना घसीटो।"
भाभी के ये शब्द आज भी लेखक के लिए अँधेरे में रोशन बनकर चमकते हैं। लेखक उस गंदगी से बाहर निकल आया है लाखों लोग आज भी उस घिनौनी जिंदगी को जी रहे हैं।
Q46. विद्यालय में लेखक के साथ कैसी घटनाएँ घटती हैं?
उत्तर: विद्यालय में लेखक को छोटी जाति का होने के कारण प्रतिदि अपमान सहना पड़ता था। उसे मैदान और बरामदे में झाडू लगा पड़ता था। हेडमास्टर की डाँट सहनी पड़ती थी। लेखक की आँखों आँसू बहने लगते थे। स्कूल के कमरे की खिड़की-दरवाजों से मास्टरों और लड़कों की आँखें छिप छिप कर तमाशा देख रही थी लेखक का रोम-रोम यातना की गहरी खाई में लगातार गिर रहा था।
Q47. घर पहुँचने पर लेखक को देख उनकी माँ क्यों रो पड़ती है?
उत्तर: समस्या थी बैल की खाल कौन उतारे। पैसों की तंगी लेखक के परिवार में थी। दस-पंद्रह रुपए मिलने वाले थे। ऊपर से कौवा-चील नोचकर बैल को साफ कर दे सकते थे। माँ ने चाचा के साथ लेखक को बैल की खाल उतारने भेजा। चाचा ने खाल उतार कर गठरी बना दी। गठरी चाचा ने ढोगी। कुछ दूर लेखक को भी ढोनी पड़ी। गठरी का वजन लेखक के वजन से ज्यादा था। घर पहुँचते-पहुँचते टाँगे जवाब दे गयीं। अब गिरे-तब गिरे की स्थिति थी। गाँव के किनारे-किनारे चलकर, लंबा चक्कर काटा था, बस्ती तक पहुँचने के लिए।
लेखक को देखकर माँ रो पड़ी थी। लेखक सिर से लेकर पाँव तक गंदगी से भरा हुआ था। कपड़ों पर खून के धब्बे साफ दिखाई दे रहे थे।
Q48. डायरी का लिखा जाना क्यों मुश्किल है?
उत्तर: डायरी लेखन एक आसान काम है। लेकिन उसमें सत्य की अभिव्यक्ति करना कठिन कार्य है। व्यक्ति अपने बारे में, परिवार और समाज के बारे में यथार्थ अभिव्यक्ति नहीं करना चाहता। तभी डायरी लेखन कठिन हो जाता है। डायरी लेखक संभव है अपनी आलोचना से वचना चाहता हो। ऐसी स्थिति में तो डायरी झूठ का पुलिंदा बनकर रह जाएगी।
Q49. डायरी क्या है?
उत्तर: डायरी-लेखन भी साहित्य लेखन का एक प्रकार है। ईमानदार लेखकों के लिए यह क्षेत्र एक दहकता हुआ जंगल है। डायरी लेखन एक तटस्थ घोसला नहीं है। डायरी लेखकों के कर्म का साक्षी होता है। यह लेखकों के संघर्ष का प्रवक्ता है। डायरियाँ प्रतिभाशाली, संवेदनशील कवि-आलोचक के आत्मनिर्माण का प्रामाणिक अंतरंग साक्ष्य है। डायरी-लेखक को खुला, ईमानदार और विचारशील होना चाहिए।
Q50. रचे हुए यथार्थ और भोगे हुए यथार्थ में क्या संबंध है?
उत्तर: रचा हुआ यथार्थ भोगे हुए यथार्थ से अलग है। भोगा हुआ यथार्थ एक दिया हुआ यथार्थ है। हर आदमी अपना-अपना यथार्थ रचता है और उसे रचे हुए यथार्थ का एक हिस्सा दूसरों को दे देता है। हर एक का भोगा हुआ यथार्थ दूसरों के लिए दिए हुए हिस्से के यथार्थ का एक सामूहिक नाम है।