Class 12 Hindi – लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Notes)
महत्वपूर्ण कहानी आधारित प्रश्न
Q51. 'धरती का क्षण' से क्या आशय है?
उत्तर-यहाँ धरती का क्षण का तात्पर्य है यथार्थ घटना जो इस धरती पर घट रही है। नए-नए अनुभव इस धरती पर मनुष्य को होते रहते हैं। इन अनुभवों को पकड़कर, इन धरती के क्षणों को पकड़कर रचनाकार अपनी रचना को समृद्ध करता रहता है।
Q52. 'जहाँ भय है वहाँ मेधा नहीं हो सकती।' क्यों?
उत्तर-बचपन से ही आपका एक ऐसे वातावरण में रहना अत्यंत आवश्यक है जो स्वतंत्रतापूर्ण हो। हममें से अधिकांश व्यक्ति ज्यों-ज्यों बड़े होते जाते हैं, त्यों-त्यों ज्यादा भयभीत होते जाते हैं, हम जीवन से भयभीत रहते हैं, नौकरी के छूटने से, परम्पराओं से, और इस बात से भयभीत रहते हैं कि पड़ोसी, पत्नी या पति क्या कहेंगे, हम मृत्यु से भयभीत रहते हैं। हममें से अधिकांश व्यक्ति किसी-न-किसी रूप में भयभीत हैं और जहाँ भय है वहाँ मेधा नहीं हो सकती।
Q53. लेखक के अनुसार सुरक्षा कहाँ है? वह डायरी को किस रूप में देखना चाहता है?
उत्तर-सुरक्षा डायरी में भी नहीं। वहाँ सिर्फ पलायन है। सुरक्षा कहीं हो सकती है। तो बाहर सूरज की रोशनी में, अँधेरे में नहीं। अँधेरे में सिर्फ छिपा जा सकता है, एक-एक पल की धुकधुकी के साथ। सुरक्षा चुनौती को झेलने में ही है, लड़ने में, पिसने में और खटने में। बचाने में नहीं, अपने को सेने में नहीं।
Q54. क्रांति करना, सीखना और प्रेम करना तीनों पृथक-पृथक प्रक्रियाएँ नहीं है, कैसे?
उत्तर-क्रांति हमें समाज की कमजोर परम्पराओं को तहस-नहस कर नयी व्यवस्था लाने के लिए करना पड़ता है। क्रांति से ही पतन, भ्रष्टाचार इत्यादि का समूल नाश सम्भव है।
सीखना तो जीवन भर चलता रहता है। यदि हमने सीखना बन्द कर दिया तो हमारी प्रगति ही रुक जाएगी। प्रत्येक वस्तु से हम सीखते रहते हैं।
जब हम ध्यान से सीखते हैं, प्रेम से सीखते हैं तो कोई भी खोज कर लेते हैं। समग्र मन और सम्पूर्ण मन उसी खोज में संलग्न हो जाता है। यदि हम महत्त्वाकांक्षी नहीं होंगे तो हमारा हास ही होगा।
निष्कर्षतः क्राति करना, सीखना और प्रेम करना तीनों पृथक-पृथक प्रक्रियाएँ नहीं है।
Q55. जीवन क्या है?
उत्तर-केवल उद्योग या व्यवसाय ही जीवन नहीं है। जीवन बड़ा अद्भुत है, असीम है और अगाध है, यह अनंत रहस्यों को लिए हुए है, यह एक विशाल साम्राज्य है, जहाँ हम मानव कर्म करते हैं और यदि हम केवल आपको केवल आजीविका के लिए तैयार करते हैं तो हम जीवन का पूरा लक्ष्य ही खो देते हैं। कुछ परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर लेने अथवा किसी विषय में प्रवीणता प्राप्त कर लेने की अपेक्षा जीवन को समझना कहीं ज्यादा कठिन है।
जीवन विलक्षण है। ये पक्षी, ये फूल, ये वैभवशाली वृक्ष, यह आसमान, ये सितारे, ये सरिताएँ, ये मत्स्य, यह सब हमारा जीवन है। जीवन दीन है, जीवन अमीर भी । जीवन समुदायों, जातियों और देशों का पारस्परिक सतत् संघर्ष है। जीवन ध्यान है, जीवन धर्म भी । जीवन गूढ़ है, जीवन मन की प्रच्छन्न वस्तुएँ हैं- ईर्ष्याएँ, महत्त्वकांक्षाएँ, वासनाएँ, भय, सफलताएँ, चिंताएँ। केवल इतना ही नहीं अपितु इससे कहीं ज्यादा जीवन है।
Q56. दो हमजोली सहेलियों की बातचीत में क्या स्थिति होती हैं?
उत्तर-दो हमजोली सहेलियों की बातचीत का कुछ जायका ही निराला है। रस का समुद्र मानो उमड़ा चला आ रहा है। इसका पूरा स्वाद उन्हीं से पूछना चाहिए जिन्हें ऐसों की रस सनी बात सुनने को भी भाग्य लड़ा है।
Q57. हिन्दी का श्रेष्ठतम महाकाव्य कौन-सा है?
उत्तर-हिन्दी का श्रेष्ठतम महाकाव्य तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस है।
Q58. स्त्री को अहेरिन, नागिन और जादूगरनी कहने के पीछे क्या मंशा होती है, क्या ऐसा कहना उचित है?
उत्तर-बनार्ड शा ने नारी को अहेरिन और नर को अहेर माना है। तात्पर्य यह कि अहेर को अहेरिन के पास से बचकर चलना चाहिए। कुछ कवि नारी को 'नागिन' या जादूगरनी समझते हैं। इसके पीछे की मंशा नारी को दुर्बल और पुरुष को सबल करार देना था। नारी की दुर्बलता कल्पित है। पुरुष की सबलता भी कल्पित एवं दुलराने के लिए है। विकार तो नारी और नर दोनों में है। जादूगर का गुण नारी में कम और पुरुष में अधिक होता है। ऐसा कहना उचित नहीं है। शिकार तो पुरुष ही करता है।
Q59. फिरंगी मेम के बाग में क्या-क्या था?
उत्तर-फिरंगी मेम के बाग में मखमल सी हरी घास है। फल एवं दूध की वर्षा मेमें कर देती हैं।
Q60. लोहा क्या है? इसकी खोज क्यों की जा रही है?
उत्तर-लोहा एक धातु है जो हमारे जीवन का आधार है। यह कर्म का प्रतीक भी है। यह हमारे घर के चारों ओर पाया जाता है। लोहा गृहस्थी में सर्वव्याप्त है। काम करनेवाला मजदूर भी लौहवत माना जाता है। स्त्री जो अत्याचार से पीड़ित है और दुखों का बोझ उठाती हैं, वह भी लौहवत है। लोहा है। परिश्रमी भी लौहवत है। इसकी खोज इसलिए की जा रही है कि यह हमारे जीवन एवं संबंधों में भी व्याप्त है। लोहा मनुष्य जीवन से अभिन्न है।
Q61. दोनों लड़कियाँ कौन हैं?
उत्तर-युद्धकाल में ये दोनों लड़कियाँ प्राण-रक्षार्थ भाग कर भारत आई हैं। ये रिफ्यूजी शरणार्थी हैं। ये लड़कियाँ क्रिस्टान है। वे भोजन के लिए भिक्षाटन कर रही हैं। ये रंगून (बर्मा) से आई हैं। ये एक पुरानी धर्मशाला में ठहरी हुई हैं। वे कहती हैं-घर-बार उजड़ गया है। भीख का ही आसरा है। जापानी जहाजों ने बम मार-मार कर सारा शहर उजाड़ दिया है।
Q62. तिरिछ क्या है?
उत्तर-उत्तर-तिरिछ (विषखापर) एक जहरीला लिजार्ड है। इसका काटा आदमी बच नहीं पाता है। इसमें काले नाग से सौ गुना ज्यादा जहर होता है। तिरिछ नजर मिलते ही दौड़ता है। पीछे पड़ जाता है। उससे बचने के लिए कभी सीधे नहीं भागना चाहिए। टेढ़ा-मेढ़ा, चक्कर काटते हुए, गोल-मोल दौड़ना चाहिए।
'तिरिछ' कहानी एक उत्तर आधुनिक त्रासदी है। यह कहानी जादुई यथार्थ है।