Class 12 Hindi – लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Notes)
पद्य खंड
Q1. 'हृदय की बात' का क्या अर्थ है?
उत्तर- छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद ने 'तुमुल कोलाहल कलह में' कविता में कहा है कि यह संसार कोलाहल से भरा हुआ है। चारों ओर युद्ध का विषाक्त वातावरण है। ऐसी स्थिति में बुद्धि हार जाती है और हृदय की बात, सकून की बात और धैर्य की बात अधिक श्रेष्ठ प्रतीत होती है।
यह उक्ति श्रद्धा (स्त्री) की है। श्रद्धा कहती है कि वह मन को शान्ति प्रदान करेगी। वह बुद्धि नहीं है। वह हृदय की बात है। वह प्रेम की बात है। वह शान्ति प्रदान करेगी।
Q2. हरचरना कौन है?
उत्तर- रघुवीर सहाय द्वारा रचित कविता 'अधिनायक' शीर्षक कविता में 'हरचरना' एक सामान्य आदमी का प्रतीक है। आम आदमी कष्टो एवं अभावों में जीता है। वह महाबली नेताओं का गुणगान करता है। 'हरचरना' का शुद्ध उच्चारण 'हरिचरण' है। वह ढीला-ढाला पैजामा पहने हुए है। राष्ट्रीय त्योहार के दिन समारोह में सम्मिलित होता है। उसमें झंडात्तोलन देखने की लालसा है। वह 'अधिनायक' की प्रशंसा के गीत गाता है- 'जन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता।' स्वयं तो वह फटा-चुटा कपड़े पहनता है और दूसरी ओर अधिनायक का गुणगान करता है। ऐसे व्यक्ति सहज ही पहचान लिए जाते हैं।
Q3. प्यार का इशारा और क्रोध का दूधारा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर- प्यार से जन-जन जीवन जीते हैं। एक-दूसरे को प्यार करते हैं। क्रोध की तलवार से पूँजीपति मारे जाएँगे। एक तरफ जन-शोषित । शोषकों के खिलाफ शोषितों की लड़ाई इस धरती पर हमेशा से चलती रही है। जन-संघर्ष करने वाले श्रमजीवी प्यार से रहते हैं। जब वो क्रोधित हो जाएँगे तो धरती पर से पूँजीपतियों का नाश हो जाएगा।
Q4. अधिनायक कौन है?
उत्तर- भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिनायक सत्ताधारी वर्ग का प्रतीक है। वह सत्ताधारी वर्ग ठाट-बाट से रहता है। वह भड़कीले खद्दर पहनता है और सबसे रोब-दाब ऐंठता है।
Q5. भूषण ने शिवाजी की तुलना मृगराज से क्यों की है?
उत्तर- वीररस के कवि भूषण ने शिवाजी की तुलना जंगलों के राजा शेर से की है। विशाल शरीरधारी जंगली हाथी को शेर मार डालता है। हाथी एक स्थूल जानवर है, जबकि शेर एक फुर्तीला जानवर होता है। हाथी और शेर की लड़ाई में हाथी मारा जाता है। उसी प्रकार शिवाजी वीर, साहसी और पराक्रमी थे। वे मृगराज की तरह पराक्रमी वीर थे।
Q6. कवि ने अपनी एक आँख की तुलना दर्पण से क्यों की है?
उत्तर- मलिक मुहम्मद जायसी ने 'कड़बक' शीर्षक कविता में अपनी एक आँख से ही 'पदमावत' लिखने 'और दुनिया देखने की बात कही है। जायसी ने अपनी इस एक आँख को दर्पण की तरह बताया है। दर्पण में जैसी तस्वीर सामने आती है जैसी वह होती है। दर्पण झूठ नहीं बोलता। कवि की आँख भी दर्पण की तरह है। वह जैसा देखता है, वैसा ही भाव कर लिखता है। उसके भाव दर्पण की तरह पारदर्शी होते हैं। वह निर्मल भाव हृदय में लाकर उसकी अभिव्यक्ति करता है। इसे सभी रूपवंत बड़े चाव से सुनते हैं। जायसी को एक आँख होने की कुंठा भी नहीं है।
Q7. सूर के काव्य की किन विशेषताओं का उल्लेख कवि (नाभादास) ने किया है?
उत्तर- सूर कृष्णकाव्य परम्परा के कवि हैं। सूर अष्टछाप के आठ कवियों में प्रथम है। कृष्ण उनके इष्टदेव हैं।
सूर की कविता में उक्ति का चमत्कार, वाक् चातुर्य, अनूठे अनुप्रास और वर्णों की यथार्थ स्थिति मिलती है। उनकी कविता में वचन एवं प्रेम की निर्वाह गहराई के साथ मिलता है। उनकी तुकवादी में अद्भुत अर्थ छिपा रहता है। उनके हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति दिव्य रूप से प्रतिबिम्बित होता दिखाई पड़ता है। वे श्री कृष्ण की लीला का बखान करते हैं। उन्होंने अपनी जिह्वा और वाणी से प्रभु श्री कृष्ण के जन्म, कर्म, गुण, रूप इत्यादि को दिव्य दृष्टि से देखकर प्रकाशित किया है। जो भक्त उनके गुणों का श्रवण एवं धारण करता है, उसकी बुद्धि विमल शुद्ध एवं पारदर्शी हो जाती है। ऐसा कौन भक्त या कवि या श्रोता है जो उनकी कविता को सुनकर सिर न डुलाता हो। सभी झूमने लगते हैं।
इन पंक्तियों में सूर की काव्यकला एवं उसकी प्रभावान्विति का बखान किया गया है।
Q8. 'रकत की लेई' का क्या अर्थ है?
उत्तर- मलिक मुहम्मद जायसी ने कड़बक शीर्षक कविता में प्रेम की पीड़ा का वर्णन किया है। प्रेम की इस पीड़ा-कथा को खून की लेई (गोंद) बनाकर, जोड़कर लिखा है। गहरे प्रेम की कथा को नयनों के आँसुओं से भिंगोकर लिखा है। सुननेवाले प्रेम की पीड़ा का अनुभव करते हैं। ऐसा इसलिए किया है कि जायसी की यह निशानी अमर रह जाएगी। जायसी अमर कवि कहलाएँगे। उनकी कीर्ति अमर रहेगी।
Q9. गायें किस ओर दौड़ पड़ी?
उत्तर- सबेरा होते ही गाएँ अपनी गोशाला में अपने बछड़ों को दूध पिलाने के लिए दौड़ पड़ीं।
Q10. पठित पदों के आधार पर तुलसी की भक्ति-भावना का परिचय दीजिए।
उत्तर- कवि तुलसी दरिद्रता से मुक्ति के लिए सीता माता के मार्फत् अपने निवेदन राम तक पहुँचाते हैं। उनकी पंक्तियों में विनयशीलता कूट-कूट कर भरी हुई है। राम का नाम जपने से उनकी सांसारिकता छूट जाती है। राम कृपालु हैं। वे तुलसी की बात अवश्य सुनेंगे।
तुलसी अत्यन्त भावुकता पूर्ण शब्दों में प्रभु से प्रार्थना करते हैं। इस दीन की सुधि कौन लेगा ? इस दरिद्र की दरिद्रता कौन भरेगा ? वे करुणा की भीख माँगते हैं।