Class 12 Hindi – लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Notes)
पद्य खंड
Q11. दूसरे पद में तुलसी ने 'दीनता' और 'दरिद्रता' दोनों का प्रयोग क्यों किया है?
उत्तर- दीनता और दरिद्रता लगभग समानार्थक शब्द हैं। दीनता दीन होने का भाव है। दीनता में नम्रता होती है। दीनता गरीबी को कहते हैं। दीनता विपन्नता को कहते हैं। दीनता मनुष्य की दुरवस्था है। दीनता में मनुष्य की दुर्दशा होती है। दरिद्रता भी गरीबी, कंगाली, निर्धनता और अभावग्रस्तता का दूसरा नाम है। दीनता दूर हो सकती है, दरिद्रता के कीचड़ में फँसा आदमी फँसता ही जाता है। अकाल में उस समय लोग फँस गए थे। इसीलिए दीनता और दरिद्रता दोनों शब्दों का प्रयोग तुलसीदास ने किया है।
Q12. तुलसी सीता से कैसी सहायता चाहते हैं?
उत्तर- तुलसी सीता से कहते हैं कि उचित एवं प्रसन्न अवसर पाकर कोई करुणापूर्ण प्रसंग उठाकर श्री राम की दयापूर्ण मनःस्थिति में श्रीराम को तुलसी की याद दिलाने की कृपा करें। वे तुलसी की दीन-हीन दशा का वर्णन श्रीराम से कर दें। यदि ऐसा हो जाए तो तुलसी की भवसागर की नैया पार लग जाएगी। तुलसी तो उनका नाम लेकर ही उदर-पूर्ति करनेवाला मानव है।
Q13. तुलसी को किस वस्तु की भूख है?
उत्तर- तुलसीदास कहते हैं कि वे तो जन्म से ही भूस्खे हैं। आप (श्रीराम) गरीबों का हित करनेवाले हैं। भीख माँगकर अपना पेट वे आजीवन भरते रहे। अब वे राम के प्रति अनन्य भक्ति और निष्ठा की भीख माँग रहे हैं। अनन्य भक्त अटूट भक्ति की ही भीख माँगा करते है।
Q14. नाभादास ने 'छप्पय' में कबीर की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर- नाभादास ने अपने छप्पय में कबीर की प्रशंसा की है। कबीर निर्गुण काव्य परम्परा के कवि थे। वे ज्ञानाश्रयी संतकाव्य परम्परा के कवि थे। कबीर की नजर में भक्ति विहीन जो धर्म है, वे सब अधर्म कर गए हैं। योग, यज्ञ, व्रत, दान और भजन के बिना शेष सब तुच्छ है। कबीर ने हिन्दुओं और तुरकों को रमैनी, सबदी और साखी को प्रमाण-उदाहरण देकर समझाया है। कबीर ने किसी धर्म के साथ पक्षपात नहीं किया। सबके हित की बात की। जगत की दशा देखकर ही कबीर ने अपनी बात की। मुँह देखी बात उन्होंने नहीं की। कबीर ने शुद्ध अन्तः करण से की गयी भक्ति को श्रेष्ठ माना है। सच है, कबीर वाणी के डिक्टेटर थे।
Q15. कबीर ने भक्ति को कितना महत्त्व दिया है?
उत्तर कबीर निर्गुण संतकाव्य परम्परा के कवि थे। समाज में घूम-घूम कर वे समाज एवं भक्ति-पद्धति के दोष बतलाते थे। वे घट-घट में बसे राम को जाग्रत करने पर बल देते थे। वे ढाई अक्षर प्रेम पर बल देते थे। वे हिन्दू धर्म में व्याप्त पाखंडों एवं रूढ़ियों की निन्दा करते थे। उनके लिए सगुण भक्ति निंदनीय एवं निर्गुण भक्ति अभिनन्दनीय थी।
Q16. छत्रसाल की तलवार कैसी है? वर्णन कीजिए।
उत्तर- पन्ना के बुन्देला राजा छत्रसाल की तलवार अत्यन्त आक्रामक, कवि भूषण ने बतायी है। तलवार प्रलय के सूर्य की तीव्र किरण की तरह प्रतीत होती है, जब वह म्यान से निकलती है। तलवार अंधकार को चीरने वाली सूर्य किरण की तरह है। यह तलवार शत्रुओं के हाथियों को टुकड़े-टुकड़े कर देती है। यह तलवार तीव्र गति से चलती है। यह तलवार नागिन की तरह शत्रुओं की गर्दन से लिपट जाती है। वह दुश्मनों की गर्दन को धड़ से अलग कर देती है। यह कार्य ऐसा प्रतीत होता है मानो वह रुद्र (शंकर) को मुण्ड की माला अर्पित करके उन्हें प्रसन्न करना चाह रही हो। ऐसी तीव्र, तीखी आश्रयदाता राजा छत्रसाल की तलवार है।
Q17. भूषण रीतिकाल की किस धारा के कवि हैं, वे अन्य रीतिकालीन कवियों से कैसे विशिष्ट हैं?
उत्तर- भूषण रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्य धारा के कवि हैं। उनकी कविता में वीर रस पाया जाता है। इसीलिए वे शृंगारिक कवियों से श्रेष्ठ हैं। इसीलिए वे विशिष्ट हैं।
Q18. माँ के लिए अपना मन समझाना कब कठिन है और क्यों?
उत्तर- माँ बेटे के बिना जीवित नहीं रह सकती। बेटा खोकर माँ अपने हृदय को नहीं समझा पाती है। वह बेटा कहकर दुलारती है और निवेदन करती है कि पुत्र उसे छोड़कर फिर कभी न जाए।
Q19. चातकी किसके लिए तरसती है?
उत्तर- छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद अपनी कविता 'तुमुल कोलाहल कलह में' कहते हैं कि चातकी स्वाति नक्षत्र के जल के लिए तरसती रहती है। संसार मरुस्थल की आग में झुलसता रहता है। चातकी स्वाति नक्षत्र के एक बूँद, एक-एक बूँद के लिए तरसती रहती है। वह अतृप्त तड़पती रहती है।
Q20. पुत्र को 'छौना' कहने में क्या भाव छुपा है, उसे उ‌द्घाटित करें।
उत्तर- हिरण के शावक की तरह माँ का बच्चा होता है। उसे अनेक कष्टों से माँ को बचाना पड़ता है। माँ पुत्र के प्रति छौना कहकर असीम प्यार प्रदर्शित करती है।
Q21. कवयित्री का 'खिलौना' क्या है?
उत्तर- कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 'पुत्र-वियोग' में उनका खिलौना उसका पुत्र है जो खो गया है। उसके वियोग में कवयित्री तड़पती-तरसती रहती है, क्योंकि उनमें एक माँ का हृदय भी है। माँ का हृदय पुत्र के निधन पर विदीर्ण हो उठा है।
Q22. प्रात नभ की तुलना बहुत नीला यांख से क्यों की गई है?
उत्तर- शंख ध्वनि की तरह नभ भी ध्वनित हो रहा है। शंख पवित्र होता है। प्रातःकालीन आकाश भी दिव्य होता है।
Q23. 'राख से लीपा हुआ चौका' के द्वारा कवि ने क्या कहना चाहा है?
उत्तर- आकाश की सुषमा को रसोईघर की सुषमा से कवि जोडता है। प्रातःकाल का नभ राख-सी लीपे हुए चौके के समान कुछ नीला-सा है। यहाँ दिव्यता और पवित्रता का भी भाव है।
Q24. प्रात नभ की तुलना बहुत नीला शंख से क्यों की गई है?
उत्तर- प्रयोगशील-प्रगतिशील कवि शमशेर बहादुर सिंह ने 'उषा' शीर्षक कविता में सूर्योदय के पहले और बाद का मनोरम, मनोहारी और दिव्यतापूर्ण चित्र शब्दों में खींचा है। प्रातः का नभ नीले आकाश की तरह है और यह ऐसा लग रहा है कि नीला शंख हो। शंख शुद्ध होता है। आशय भी शुद्ध है। शंख बजने पर ईश्वरीय भावनाओं का संचार होता है। आकाश में सूर्योदय का सूर्य आने पर गर्मी फैलती है और पशु-पक्षी ध्वनि करने लगते हैं। मनुष्य भी जाग जाते हैं।
Q25. 'लाल केसर' और 'लाल खड़िया चाक' किसके लिए प्रयुक्त है?
उत्तर- आकाश की सुषमा का वर्णन कवि लाल केसर के सहारे करता है। 'लाल खड़िया चाक' की भी उपमा उसी सौन्दर्य के बखान के लिए दी गयी है।