Class 12 Hindi – लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Notes)
पद्य खंड
Q26. कवि ने सितारे को भयानक क्यों कहा है? सितारे का इशारा किस ओर है?
उत्तर: लाल डांड पर सितारा, हँसिया हथौड़ा मनुष्य की एक मात्र आ है। यह सितारा भयानक है। यह इस धरती से पूँजीपतियों का नाश और समाजवादियों की विजय कराएगा। इससे जो संकेत मिलते है, वे विकराल हैं। शोषकों को संभलना होगा, शोषकों को चेतना होगा।
Q27. ज्याला कहाँ से उठती है? कवि ने इसे 'अतिशुद्ध' क्यों कहां
उत्तर: ज्वाला मानस में उठती है। जब ज्वाला भभकती है तो मानस अतिकुद्ध हो उठता है। शोषण के खिलाफ शोषित अत्यंत क्रोधित हो उठते हैं। पूँजीपति के खिलाफ शोषित वर्ग गुस्से में आ जाता है।
Q28. 'जन-जन का चेहरा एक' से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: प्रगतिशील कवि गजानन माधव 'मुक्ति बोध' ने 'जन-जन का चेहरा एक' शीर्षक कविता में जन-जन के संघर्ष को वाणी दी है। कवि की दृष्टि और संवेदना वैश्विक और सार्वभौमिक दिखाई पड़ती है। कवि पीड़ित और संघर्षशील जनता का, जो मानवोचित अधिकारों के लिए कर्मरत है, चित्र प्रस्तुत करता है। यह जनता दुनिया के तमाम देशों में संघर्षरत है और अपने कर्म और श्रम से न्याय, शांति, बंधुत्व की दिशा में प्रयासरत है। कवि इन जनता में एक अन्तर्वर्ती एकता देखता है और इस एकता को कविता का कथ्य बनाकर संघर्षकारी संकल्प में प्रेरणा और उत्साह का संचार करता है। कवि शोषण के खिलाफ आवाज उठाता है।
Q29. बंधी हुई मुट्ठियों का क्या लक्ष्य है?
उत्तर: जनता की सरकार के खिलाफ और शोषितों की शोषकों के खिलाफ अब मुट्ठी बँध चुकी है। ये जन मुट्ठी बाँधकर निर्णय ले चुके हैं कि शोषकों को इस धरती से हम मार भगाएँगे। इनका लक्ष् निर्धारित हो चुका है। सावधान, सावधान पूँजीपतियों, सावधान।
Q30. 'डरा हुआ मन बेमन जिसका बाजा रोज बजाता है' यहाँ 'बेमन' का क्या अर्थ है?
उत्तर: बिना मन के, बिना श्रद्धा के जनसाधारण को, कामगारों को सत्ताधारी लोगों का गुणगान करना पड़ता है। सामान्य वर्ग सत्ताधारी वर्ग की हाँ में हाँ मिलाता है।
Q31. समूची दुनिया में जन-जन का युद्ध क्यों चल रहा है?
उत्तर: समूची दुनिया में शोषकों के खिलाफ जन-जन का, शोषित से युद्ध चल रहा है। समूची दुनिया पर साम्राज्यवादियों का कब्जा है और जनवादियों की हार हो रही है। अब पूँजीपति अधिक दिनों तक नहीं टिकेंगे। एक दिन जन-जन की जीत होगी ही।
Q32. पृथ्वी के प्रसार को किन लोगों ने अपनी सेनाओं से गिरफ्तार कर रखा है?
उत्तर: पृथ्वी के प्रसार को साम्राज्यवादियों और पूँजीवादियों की सेनाओं ने गिरफ्तार कर रखा है। उनका हृदय साफ नहीं होता। उनके हृदय में कालापन होता है। जन-जन, श्रमजीवी अपने शोषकों को पहचानते हैं। एक दिन श्रमजीवी उनका नाश कर देंगे।
Q33. 'हार-जीत' कविता में मशकवाले की क्या भूमिका है?
उत्तर: अशोक वाजपेयी द्वारा रचित गद्य-कविता 'हार-जीत' में एक बूढ़ा मशकवाला है। उसकी भूमिका सड़कों के सींचने की है। देश की सेना युद्ध में हार गयी है-यह बताने का अधिकार उसे नहीं है। नागरिक उसकी इस बात पर विश्वास भी नहीं करते कि सेना हार गयी है। मशकवाले की भूमिका सच दर्ज करने की नहीं है। जिन पर है वे सेना के साथ ही जीतकर लौट रहे हैं।
Q34. राष्ट्रीय पर्व पर किसका गुणगान गाया जाता है?
उत्तर: राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रगीत गाया जाता है। उसमें भारत के भाग्य विधाताओं का गुण गाया जाता है। उसमें राष्ट्र अधिनायक का गुण गाया जाता है। उसमें राष्ट्र के निर्माताओं का गुण गाया जाता है। लेकिन प्रस्तुत कविता 'अधिनायक' में वर्तमान राजनेताओं पर व्यंग्य किया गया है क्योंकि वे देश का सही नेतृत्व नहीं करते। वे अपने को तानाशाह मान बैठे हैं। ऐसे नायक देश के झूठे नायक हैं। वे महाबली बलबली बन बैठे हैं। यह निन्दनीय है।
Q35. हरचरना अधिनायक के गुण क्यों जाता है? उसके हर के क्या कारण है?
उत्तर: सत्ताधारी शोषकों का गुणगान जनसाधारण को करना पड़ता है। यह शोषण का ही एक रूप है। हरचरना इस डर से शोषित होता हुआ गुण गाता रहता है।
Q36. कवि की स्मृति में घर का 'चौखट' इतना जीवित क्यों हैं?
उत्तर: गाँव के घर का चौखट कवि ज्ञानेन्द्रपति की दृष्टि में जीवित है। बचपन की स्मृति मनुष्य को आनंद देती है। बचपन की घटनाएँ वह चाव से याद करता है। इसीलिए कवि गाँव के घर के चौखट को नहीं भूलता। घर के चौखट के बाहर खड़े होकर बड़े-बूढ़े आवश्यक आदेश घर के अंदर के लिए निर्गत करते हैं। घर के अंदर हुकूमत चलती रहती है। किसी की मजाल नहीं कि वह चौखट पर से दिए गए आदेश की अवहेलना कर दे। शहर में अब न तो चौखट रहा और न वह आदेश पालन ही। सभी स्वतंत्र हो गए। सभी स्वछंद हो गए।
Q37. उत्सव कौन और क्यों मना रहे हैं?
उत्तर: 'हार-जीत' शीर्षक कविता में अशोक वाजपेयी ने कहा है कि राजा जो करता है उसे जनता मान लेती है। उत्सव देश के नागरिक मना रहे हैं। वे विजय दिवस मना रहे हैं। देश की सेना राजा के साथ युद्ध करके लौटी है। नागरिकों को पता नहीं है कि युद्ध जीतकर सेना लौटी है या हारकर ? फिर भी वे उत्सव में शामिल हो रहे हैं।
Q38. ज्ञानेन्द्रपति ने अपने गाँवों को किस-किस की जन्मभूमि बतलाया है?
उत्तर: ज्ञानेन्द्रपति रचित कविता 'गाँव का घर' में गाँव के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला गया है। गाँव मनुष्य जीवन में ईमानदारी का प्रतीक है। यह परिवार के सदस्यों की साफगोई की भी प्रतीक है। पंचायती राज की जन्मभूमि गाँव है। प्रकाश-बुलौआ की मधुर याद भी गाँव समेटे हुए हैं। गाँव होरी-चैती, बिरहा-आल्हा जैसे लोकगीतों की भी जन्मभूमि है। अब तो गाँव के रीढ़ की हड्डी ही झुरझुरा रही है। गाँव बदल गए हैं। गाँव में शहरों का आगमन हो गया है।
Q39. 'मुख देखी नहीं भनी' का क्या अर्थ है? कबीर पर यह कैसे लागू होता है?
उत्तर: नाभादास की प्रशंसा अपने 'छप्पय' में की है। वे किसी का मुँह देखकर उसकी प्रशंसा नहीं की है। जगत की जो मनोदशा-भावदशा है उसी को देखकर समझाया है।
सच है, कबीर भाषा के डिक्टेटर थे।
सच है, कबीर भाषा के डिक्टेटर थे।
Q40. प्रथम पद (कबहुँक अंब) का भावार्थ अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर: तुलसीदास द्वारा रचित 'विनय पत्रिका' में कवि माँ सीता से कहते हैं- कभी अवसर पाने पर आप राम जी से मेरा निवेदन कह दें। मेरे कष्टों की कथा सुना दें। मैं सब प्रकार से दीन हूँ और अंगहीन हूँ। मैं क्षीण-मलीन हूँ और पूर्ण पापी हूँ। मैं श्रीराम का नाम लेकर पेट भरता हूँ। मैं आपका दास हूँ। यदि श्रीराम पूछें कि यह कौन है तो उन्हें बता दें कि एक दीन-हीन है। श्रीराम कृपालु हैं। जब वे मेरी दशा सुनेंगे तो मेरी बिगड़ी बात बन जाएगी। आप जग के नारियों की सहायता करें। तुलसीदास श्रीराम का नाम लेकर तर जाएगा।