Class 12 Hindi – लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Notes)
पद्य खंड
Q41. जादू टूटता है उषा का अब सूर्योदय हो रहा है।
उत्तर- प्रस्तुत पंक्तियाँ कविता उषा से उद्धत शमशेर बहादुर सिहं द्वारा लिखित है। कवि का कहना है कि उषा का जादू देखते ही बनता है। सूर्योदय के समय प्रातःकालीन आकाश की सुषमा दर्शनीय होती है।
Q42. बूढ़ा मशकवाला क्या कहता है और क्यों कहता है?
उत्तर- बूढ़ा मशकवाला जी सड़कों पर पानी सींच रहा है, कह रहा है हम एक बार फिर हार गए हैं और गाजे-बाजे के साथ जीत नहीं हार लौट रही है। मशकवाले को यह कहने का अधिकार नहीं है। वह ऐसा इसलिए कहता है कि नागरिक जानें। शासक उत्सव मनवा रहे हैं। जनता का विश्वास शासकों पर बना रहे इसलिए उत्सव मना रहे हैं।
Q45. आवाज की रोशनी या रोशनी की आवाज का क्या अर्थ है?
उत्तर- पहले जब गाँवों में होरी, चैती, बिरहा और आल्हा गाया जाता था, तब गानेवालों की आवाज में दम होता था। आवाज दूर-दूर तक जाती थी। रोशनी भी दूर-दूर जाती थी क्योंकि यह सब खुले मैदान में होता था। रोशनी की आवाज आर्केस्ट्रा की आवाज है, जो बंद कमरे में होती है। इसमें नैतिकता की कमी होती है। इसी कारण रोशनी की आवाज जन-जन तक नहीं पहुँचती है।
Q44. सर्कस का प्रकाश-बुलौआ किन कारणों से मरा होगा?
उत्तर- सर्कस में आदमी, कामगार और श्रमजीवी अपना करतब देखलाते हैं। अब इनके प्रशंसक और दर्शक नहीं रहे। बहुत से जंगली पशु भी अब के सर्कसों में नहीं आते। उनके प्रदर्शन पर रोक लगी है। श्रमजीवियों की प्रशंसा कम हो गयी है। नकली आर्केस्ट्रा बजानेवालों को देखने के लिए लोग ज्यादा जाते हैं। गाँव आज मुकदमेबाजी, बीमारी और अशिक्षा ग्रस्त हैं। पता नहीं यह हमारी प्रगति है या दुर्गति। यह समय ही बताएगा।
इन्हीं कारणों से सर्कस का प्रकाश-बुलौआ (टार्च लाइट) अब आकाश में देखने को नहीं मिलता है।
इन्हीं कारणों से सर्कस का प्रकाश-बुलौआ (टार्च लाइट) अब आकाश में देखने को नहीं मिलता है।
Q45. गाँव के घर की रीढ क्यों झरझराती है, इस झुरझुराहट के क्या कारण है?
उत्तर- गाँव के घर की रीढ़ अब टूटने को है। घरों के मरम्मत कराने वाले लोग बाहरों में चले गए। गाँव का परिवेश बदल गया। अब ताड़ी पीने वालों और पाउच पीने वालों की संख्या बढ़ रही हैं। गाँव और गाँव की जो स्मृति हमारे दिमाग में है वह अब गाँवों से लापता हो चुकी है। गाँव अब पिछड़े हुए शहरों में तब्दील होते जा रहे हैं।
इसलिए गाँव की रीढ़ की हड्डी टूट गयी है। वह झुरझुराती है। वह 90° के कोण पर झुक गयी है और अपने मौत का इंतजार कर रही है।
इसलिए गाँव की रीढ़ की हड्डी टूट गयी है। वह झुरझुराती है। वह 90° के कोण पर झुक गयी है और अपने मौत का इंतजार कर रही है।
Q46. कविता में किस शोकगीत की चर्चा है?
उत्तर- अब लोकगीत नहीं गाए जाते। अब आर्केस्ट्रा की धड़कन पर लोगों के दिल धड़कते हैं। लोकगीतों की धरती पर बिना गया, बिना सुना शोकगीत भटकता है। गाँवों तक आर्केस्ट्रा की आवाज नहीं पहुँचती। लोकगीत के सम्मिलित स्वर अब नहीं ललकारते सुने जाते। सन्नाटा गाँवों में तब वैसा ही फैला होता है, जैसे शोकगीत गाया गया हो।