बिहार बोर्ड 12वीं हिंदी लघु उत्तरीय प्रश्न 2026 | सभी अध्याय नोट्स PDF

Anish singh
Class 12 Hindi – लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Notes)
Sociel Science Rapid Revision Notes
Q1. कुंती का परिचय दें।
उत्तर: कुंती बिशनी की पहोसिन है। अधेड़ होने पर भी उसके चेहरे पर स्वास्थ्य की लाली झलकती है। कुंती बिशनी से पूछती है- बिशनदेई आज भी कोई चि‌ट्ठी नहीं आई? बिशनी-आ कुंती। ब्रम्मा में लड़ाई हो रही है। कुंती पड़ोसिन बिशनी को मुन्नी के विवाह के लिए प्रेरित करती है। बिना मानक के विवाह कैसे हो? साधनों की कमी है।
Q2. मानक और सिपाही एक-दूसरे को क्यों मारना चाहते हैं?
उत्तर: ‘'सिपाही की माँ शीर्षक एकांकी में एकांकीकार मोहन राकेश ने युद्ध की विभीषिका का वर्णन किया है। युद्ध दो देशों के बीच अपने-अपने स्वार्थों की संतुष्टि के लिए लड़ा जाता है। युद्ध और प्यार में सबकुछ जायज और औचित्यपूर्ण माना जाता है। युद्ध में नैतिकता और उदात्तता का कोई स्थान नहीं है। मानक और सिपाही एक-दूसरे को मारना चाहते हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध में दोनों दो विरोधी सेनाओं की ओर से लड़ते हैं। मानक ने हजारों दुश्मनों को मारा। मानक ने उल्लिखित-नामित सिपाही को भी मारा। सिपाही भी मानक की जान का दुश्मन बन गया था। यदि मानक सिपाही को नहीं मारता तो वह मानक को ही मार डालता।
Q3. आर्ट ऑफ कनवरसेशन क्या है?
उत्तर: आर्ट ऑफ ‘कनवरसेशन' का अर्थ है बातचीत करने की कला। उत्तम से उत्तम ढंग से बातचीत करने की कला है। सामने वाला-सुनने वाला सुनकर प्रसन्न-प्रफुल्ल हो उठता है। यह कृत्रिम-अकृत्रिम कला यूरोप में अधिक पायी जाती है। यह कला 'स्पीच' और 'लेख' से आगे की कला है। इसकी पूर्ण शोभा काव्यकला प्रवीण विद्वनमंडली में है। ऐसे चतुराई के प्रसंग छेड़े जाते हैं कि जिन्हें सुन कान को अत्यन्त सुख मिलता है।
Q4. बातचीत के संबंध में बेन जॉनसन और एडीसन के क्या विचार हैं?
उत्तर: बेन जॉनसन का यह कहना था, कि बोलने से ही मनुष्य के रूप का साक्षात्कार होता है। बोलने से ही रूप की सुंदरता और कुरूपता का पता चलता है। एडीसन का मत है कि असल बातचीत सिर्फ दो व्यक्तियों में ही हो सकती है। जब दो आदमी होते हैं तभी अपना दिल एक-दूसरे के सामने खोलते हैं। जब तीन हुए तो वह दो की बात कोसों दूर हो जाती है।
Q5. ‘बातचीत’ निबंध की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: 'बातचीत' शीर्षक निबंध बालकृष्ण भट्ट ने लिखा है। इस निबंध में विचारों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति और तथ्यों की कसावट देखते ही बनती है। वाक्‌याक्ति अनमोल है। लेखक ने वार्तालाप की कला और गोष्ठी वार्ता पर भी प्रकाश डाला है। राम-रमौवल की भी चर्चा लेखाक ने की है। एडीसन और जॉनसन के मतों की उद्धरणी ने निबंध को परिशीलन युक्त निबंध बना दिया है। वाणी पर नियंत्रण रहने को भी लेखक ने अवश्यक बताया है। हास्य का भी समावेश निबंधों में आवश्यक है। गंभीरता भी आवश्यक है। 'बातचीत' निबंध पाठकों को तथ्यों और आनंद से भर देता है।
महत्वपूर्ण कहानी आधारित प्रश्न
Q6.‘उसने कहा था ’कहानी कितने भागों में बैंटी हुई है? कहानी के कितने भागों में युद्ध का वर्णन है?
उत्तर: 'उसने कहा था' कहानी चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने लिखी है। यह कहानी पाँच खण्डों में विभक्त है। इस कहानी के तीन भागों में युद्ध का वर्णन आया है। दूसरे, तीसरे और चौथे भाग में युद्ध का शौर्ययुक्त वर्णन है। यह एक दिव्य कहानी बन गयी है।
Q7. ‘उसने कहा था’ कहानी का केन्द्रीय भाव क्या है?
उत्तर: उर-चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा रचित कहानी 'उसने कहा था' एक प्रेम कहानी है। यह दिव्य प्रेम कहानी है। ऐसी कहानी देखने को नहीं मिलती है। अब की प्रेम कहानियाँ शारीर स्तर पर संचरित होती हैं। यह गुलेरी जी की कहानी है कि इसमें दिव्यता, उदात्तता और भावों की निष्ठता विद्यमान है। यह कहानी शुद्ध प्रेम की कहानी है। यह प्रेम की सात्विक कहानी है। यह कहानी तामसिकता से परहेज रखती है।
Q8. आंदोलन के नेतृत्व के संबंध में जयप्रकाश नारायण के विचार क्या थे? आन्दोलन का नेतृत्व वे किस शर्त पर स्वीकार करते हैं?
उत्तर: भ्रष्ट केन्द्रीय सरकार को जेपी उलट देना चाहते थे। बिहार के छात्रों ने एक आन्दोलन चलाया। बाद में जेपी इसके नेता बने। यह कांति थी-संपूर्ण क्रांति। जेपी बार-बार छात्रों से कहते थे-देश का भविष्य आपके हाथों में है। उत्साह है आपके अंदर, शक्ति है आपके अंदर, जीवनी है आपके अंदर, आप नेता बनिए। जेपी उन्हें सलाह देंगे। लेकिन छात्रों ने नहीं माना, उनको नेतृत्व करने के लिए बाध्य कर दिख जेपी ने तब कहा कि वे सबकी सलाह लेंगे। वे छात्रों की बात क्यादा सुनेंगे। लेकिन शर्त थी कि फैसला उनका होगा। इस फैसले को सभी को मानना होगा। तब तो जेपी के नेतृत्व का मतलब होगा, तभी क्रांति सफल होगी। अन्यथा सभी विखर जाएँगे।
भ्रष्टाचार की जड़ क्या है? क्या आप जे०पी० से सहमत हैं, इसे दूर करने के लिए क्या सुझाव देंगे?
उत्तर: इलेक्शन का खर्च, चुनाव का खर्च, बहुत ज्यादा है। यही भ्रष्टाचार की जड़ है। करोड़ों रुपए चुनाव में खर्च होते हैं। एक तरफ 'गरीबी हटाओ' का नारा लगाएँगे, समाजवाद का नारा लगाएँगे और चुनाव का खर्च ब्लैक मार्केटियर लोगों से इकट्ठा करेंगे-'अनअकाउंटेड मनी' करोड़ों रुपए, जिसका कोई हिसाब नहीं, कोई किताब नहीं। जे०पी० चिल्लाते रहे- इस चुनाव पद्धति में आमूल परिवर्तन होना चाहिए, चुनाव खर्च कम करना चाहिए लेकिन जे०पी० की किसी ने नहीं सुनी। परिणाम था सत्ता-पलट ।
Q10. दलविहीन लोकतंत्र और साम्यवाद में क्या संबंध है?
उत्तर: दलविहीन लोकतंत्र सर्वोदय का मुख्य राजनीतिक सिद्धांत है। ग्रामसभाओं के आधार पर दलविहिन प्रतिनिधित्व की स्थापना हो। दलविहीन लोकतंत्र मार्क्सवाद और लेनिनवाद के उद्देश्यों में से है। मार्क्सवाद के अनुसार समाज जैसे-जैसे साम्यवाद की ओर बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे राज्य-स्टेट का क्षय होता जाएगा और अंत में स्टेटलेस सोसाइटी की स्थापना होगी। वह समाज अवश्य ही लोकतांत्रिक होगा, बल्कि उसी समाज में लोकतंत्र का सच्चा स्वरूप प्रकट होगा। यह लोकतंत्र निश्चय ही दलविहीन होगा।
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