Class 12 Hindi – लघु उत्तरीय प्रश्न (Important Notes)
महत्वपूर्ण कहानी आधारित प्रश्न
Q21. 'रोज' कहानी की मालती ने किताब का क्या किया था?
उत्तर: अज्ञेय द्वारा रचित कहानी 'रोज' की नायिका मालती के पिता ने एक किताब पढ़ने के लिए दी थी और बीस पेज प्रतिदिन पढ़ने के लिए कहा था। वह नित्य ही उसके दस पन्ने, बीस पन्ने फाड़कर फेंक देती।
Q22. जयप्रकाश नारायण कम्युनिस्ट पार्टी में क्यों नहीं शामिल हुए?
उत्तर: अमेरिका प्रवास के दौरान जे० पी० घोर कम्युनिस्ट थे। वह लेनिन और ट्राटस्की का समय था। 1924 में लेनिन मरे थे। 1924 में ही जे० पी० मार्क्सवादी बने थे। मार्क्सवाद के सभी ग्रंथ उन्होंने पढ़ डाले। रात को एक रशियन टेलर के घर रोज क्लास लेते थे। वहाँ से जब वे लौटे तो घोर कम्युनिस्ट थे। लेनिन ने राष्ट्रहित में अंग्रेजों को भगाने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए। कम्युनिस्ट होकर भी वे अपने को कांग्रेस से अलग-थलग नहीं रख सके। आजादी की लड़ाई में भाग लेना था।
Q23. भगत सिंह ने कैसी मृत्यु को 'सुंदर' कहा है? वे आत्महत्या को कायरता कहते हैं, इस संबंध में उनके विचारों को स्पष्ट करें।
उत्तर: 'एक लेख और एक पत्र' शीर्षक पाठ स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह रचित है। सरदार भगत सिंह भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई के क्रांतिकारी वीर थे। वे कहते हैं कि देश की सेवा के बदले दी गई फाँसी को सुंदर मृत्यु कहा है। जब देश के भाग्य का निर्णय हो रहा हो तो व्यक्ति के भाग्य को पूर्णतया भुला देना चाहिए। भगत सिंह मानते हैं कि उनकी मृत्यु देश की स्वतंत्रता के लिए उचित है। हाँ, आत्महत्या कायरता है।
Q24. भगत सिंह की विद्यार्थियों से क्या अपेक्षाएँ हैं?
उत्तर: भगत सिंह आधुनिक भारतीय इतिहास की एक पवित्र स्मृति हैं। वे पढ़नेवाले नौजवानों (विद्यार्थियों) से अपेक्षा रखते हैं कि वे केवल पढ़ें ही नहीं। वे समझदारी भी पैदा करें। देश गुलाम है। इस गुलामी से उन्हें ही मुक्त कराना है। इसके लिए उन्हें राजनीति का सैद्वान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त करना चाहिए। ऐसा करने से देश की आजादी का रास्ता प्रशस्त हो सकेगा। आगे देश का नेतृत्व भी तो नौजवानों को ही करना होगा।
Q25. भगत सिंह ने अपनी फाँसी के लिए किस समय की इच्छा व्यक्त की है? वे ऐसा समय क्यों चुनते हैं?
उत्तर: भगत सिंह कहते हैं कि क्रांति सतत् कार्य करने में, प्रयत्नों से और कष्ट सहन करने और बलिदान करने से होती है। भगत सिंह देशवासियों के हृदय में अमिट छाप छोड़ने के लिए फाँसी की सजा चुनते हैं।
Q26. भगत सिंह रूसी साहित्य को इतना महत्त्वपूर्ण क्यों मानते हैं? वे एक क्रांतिकारी से क्या अपेक्षाएँ रखते हैं?
उत्तर: रूसी साहित्य में पायी जानेवाली वास्तविकता के कारण भगत सिंह उसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं। भारतीय साहित्य में वह और वैसी वास्तविकता नहीं मिलती। रूसी कहानियों में विपत्तियाँ सहन करने का उल्लेख मिलता है। इस कारण रूसी साहित्य सहृदयतापूर्ण हो उठता है। उसमें दर्द की हरी टीस मिलती है। उनकी साहित्य ऊँचा हो उठत है।
क्रांतिकारी वह है-जो संघर्ष करता है, विपत्तियाँ पर विजय पाता है, चिंताओं को चिंतन से दूर करता है, दुखों और कष्टों को सहन करता है। क्रांतिकारी उस विस्फोट के केंद्रों में होना चाहता है जो उन ही चिथड़े-चिथड़े कर दे। ऐसा ही गुलाम भारत के युवकों को साहित्य का ज्ञान होना चाहिए।
क्रांतिकारी वह है-जो संघर्ष करता है, विपत्तियाँ पर विजय पाता है, चिंताओं को चिंतन से दूर करता है, दुखों और कष्टों को सहन करता है। क्रांतिकारी उस विस्फोट के केंद्रों में होना चाहता है जो उन ही चिथड़े-चिथड़े कर दे। ऐसा ही गुलाम भारत के युवकों को साहित्य का ज्ञान होना चाहिए।
Q27. चम्पारण क्षेत्र में बाढ़ की प्रचंडता के बढ़ने के क्या कारण?
उत्तर: बिहार के उत्तर-पश्चिम कोण में अवस्थित चम्पारण की भूमी पेड़, पौधों एवं जंगलों से भरी हुई थी। इन पेड़ों की कटाई कृषि एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए कर दी गई। बरसात के दिनों में यहां की नदियाँ बाढ़ का पानी ला देती है। मसान, सिकराना, पंडई एवं गंडक इत्यादि नदियाँ यहाँ के निवासियों को ललकारती है। चारों ओर जल-ही-जल दिखाई पड़ती हैं। जगदीश चन्द्र माथुर ने उन नादियों के बाढ़ के पानी की उच्छृंखलता का बिम्ब 'उन्मत यौवना वीरांगनाओ’ और 'कैकेयी' के क्रोध से दिया है। पहले घना जंगल था। वृक्षों की जड़ों में पानी रुका रहता था। बाढ़ नहीं आती थी। विभिन्न जगहो के मजदूर भी आकर बसते गए और पेड़ कटते गए। बाढ़ आना लाजिमी हो गया।
Q28. पुंडलीक जी कौन थे?
उत्तर: पुंडलीक जी एक शिक्षक थे। सन् 1917 में पुंडलीक जी को गाँधीजी ने बेलगाँव से बुलाया। वे भितिहरवा आश्रम में रहकर बच्चों को पढ़ाते थे और ग्रामवासियों के दिल से भय दूर करते थे। पुंडलीक जी का व्यक्तित्व तेजस्वी, शरीर बलिष्ठ और आवाज दबंग थी। एक दिन अंगरेज एमन साहब पुंडलीक जी के आश्रम में आया। कायदा था कि साहब जब आए तो गृहपति उसके घोड़े की लगाम पकड़े। पुंडलीक जी ने कहा- 'नहीं उसे आना है तो मेरी कक्षा में आए, मैं लगाम पकड़ने नहीं जाऊँगा'। एमन ही डर गया।
पुंडलीक जी ने गाँधी जी से सीखी निर्भीकता और वही निर्भीकता उन्होंने गाँववालों को दी। चम्पारण अभियान का सबसे बड़ा वरदान यही निर्भीकता थी।
पुंडलीक जी ने गाँधी जी से सीखी निर्भीकता और वही निर्भीकता उन्होंने गाँववालों को दी। चम्पारण अभियान का सबसे बड़ा वरदान यही निर्भीकता थी।
Q29. अंग्रेज नीलहे किसानों पर क्या अत्याचार करते थे?
उत्तर: बेतिया राज की जमींदारी में अंग्रेज ठेकेदार बन गए और उन्नीसवीं सदी में नील की खेती का विस्तार किया। नील से ही उन दिनों रंग बनते थे और इसीलिए नील की पाश्चात्य देशों में बहुत माँग थी। लाखों की सम्पदा उन अंग्रेज ठेकेदारों के हाथ लगी किन्तु रैयत का कोई लाभ नहीं हुआ। बेतिया राज से बहुत कम अदागयी पर ए हजारों एकड़ जमीन इन गोरे ठेकेदारों ने ले ली। ठेठ देहात में उनकी भव्य कोठियाँ खड़ी हो गयी। किसानों से जबरदस्ती नील की खेती कराई गई। हर बीस कट्ठा जमीन में तीन कट्ठा नील की खेती के लिए हर किसान को रखना लाजिमी था।
Q30. इतिहास की क्रीमियाई प्रक्रिया का क्या आज्ञाय है?
उत्तर: पारे को सोने में बदलने की प्रक्रिया क्रीमियाई प्रक्रिया है। इसके अन्तर्गत पारे को कुछ लेपनों-विलेपनों के साथ उच्च तापक्रम पर गर्म किया जाता है।इतिहास की क्रीमियाई प्रक्रिया के तहत एक प्रदेश के लोग जब सुदूर दूसरे क्षेत्र में जाकर बस जाते हैं तो इसे इतिहास की क्रीमियाई प्रक्रिया कहते हैं।
यहाँ बारहवीं सदी से लगभग तीन सौ वर्ष तक कर्णाट वंश का राज्य था। प्रथम राजा नान्यदेव, चालुक्य नृपति सोमेश्वर पुत्र विक्रमादित्य के सेनापति, नेपाल और मिथिला की विजय यात्रा पर आए और फिर यहीं बस गए। इस तरह सुदूर दक्षिण का रक्त और संस्कृति इस प्रदेश की निधि बने।
चम्पारण की धरती के निवासी भी प्राचीन और नवीन के मिश्रण हैं। थारु और धाँगड़ जातियाँ यहाँ आकर बसीं।
यही है इतिहास की क्रीमियाई प्रक्रिया।
यहाँ बारहवीं सदी से लगभग तीन सौ वर्ष तक कर्णाट वंश का राज्य था। प्रथम राजा नान्यदेव, चालुक्य नृपति सोमेश्वर पुत्र विक्रमादित्य के सेनापति, नेपाल और मिथिला की विजय यात्रा पर आए और फिर यहीं बस गए। इस तरह सुदूर दक्षिण का रक्त और संस्कृति इस प्रदेश की निधि बने।
चम्पारण की धरती के निवासी भी प्राचीन और नवीन के मिश्रण हैं। थारु और धाँगड़ जातियाँ यहाँ आकर बसीं।
यही है इतिहास की क्रीमियाई प्रक्रिया।